बाढ़ के बाद अब टिड्डियों ने बोला फसल पर हमला, हरियाणा और राजस्थान के किसानों की फसल हुई चौपट

पाकिस्तान से आई टिड्डियों का आतंक (जो कि ट्रीट ऑफ लोकस्ट के रूप में जाना जाता है), फिर से फसलों के लिए खतरा बढ़ा रहा है। पाकिस्तानी टिड्डियाँ अंडे देकर सरहदी जिलों में फसलों पर विपणन कर रही हैं, जो सौ हेक्टेयर से अधिक है। किसानों का डर है कि इन टिड्डियों को नियंत्रित नहीं किया गया तो वे कुछ ही दिनों में बड़े होकर मूंगफली, मोठ, मूंगफली और अन्य फसलों को बर्बाद कर सकते हैं। इस समय अगस्त महीने में मानसून की असमानता ने किसानों की चिंता को और भी बढ़ा दिया है।

राजस्थान और गुजरात के भारत-पाकिस्तान सीमान्त क्षेत्रों में टिड्डियों के नियंत्रण के लिए सर्वे कार्रवाई जारी है। इन क्षेत्रों में इस बार 155 स्पॉट खोजे गए हैं, जिनमें टिड्डियों के अंडे देने की संभावना है।

पाकिस्तान सीमा के पास के जिलों में टिड्डियों की संख्या बढ़ी है। इन टिड्डियों ने पूरी तरह से रेगिस्तानी राजस्थान में जाल बिछाया है। इसके अलावा, टिड्डी बाड़मेर, जैसलमेर, सम, फलोदी, बीकानेर, सूरतगढ़, चूरू, नागौर, जोधपुर, जालोर, पालनपुर और गुजरात के भुज में भी देखी गई हैं। टिड्डी विभाग ने भारत-पाक सीमा के पास राजस्थान के दस जिलों और गुजरात के कुछ हिस्सों में हर महीने दो बार सर्वे करके पाकिस्तान से आने वाली टिड्डियों की गतिविधियों का पता लगाया है।

2019 में पाकिस्तान से आए टिड्डी दल ने मचाई थी तबाही

टिड्डी विभाग के डॉ. वीरेंद्र ने बताया कि जुलाई में बरसात के बाद से रेगिस्तानी क्षेत्रों में टिड्डी का खतरा बढ़ गया है। ये टिड्डियां इतनी घातक हैं कि सिर्फ तीन मिनट में एक पेड़ काट सकती हैं। 2019 में पाकिस्तान से आए टिडि्डयों के एक दल ने फसलों पर जो तबाही मचाई, उसने किसानों को रुला दिया था। तब बड़े शहरों में भी हजारों किसानों की फसलें चट करने के बाद उनका आतंक देखा गया।

इस बार भी स्थिति टिड्डियों के अनुकूल है

पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर और आसपास के क्षेत्रों में इस बार भारी बारिश हुई है। ऐसे में यहां जमीन में नमी और हरियाली बढ़ी है, विशेषज्ञों का कहना है। यही कारण है कि यह परिस्थितियां टिड्डियों के पनपने के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं। टिड्डी बीकानेर और सरहदी जिलों में मिली है। टिड्डियों का एक बड़ा दल जैसलमेर से 150 किमी दूर मोहनगढ़ कस्बे में 150 हेक्टेयर खेतों में रहता है। ये अभी अंडों से निकले ही हैं, लेकिन तेजी से बढ़ रहे हैं।

नियंत्रण के लिए चार जिलों  की टीम कर रही है प्रयास

टिड्डी नियंत्रण दल की टीम में 20 से अधिक अधिकारी और कृषि विभाग के कर्मचारी जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और जोधपुर से स्प्रे की चार गाड़ियों के साथ सर्वे कर रहे हैं। अभी भी ये होपर हैं, जो फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाते। लेकिन जब वे उड़ने के योग्य हो जाएंगे तो इन पर नियंत्रण करना मुश्किल हो जाएगा। ताकि खतरा बढ़े नहीं, टिड्डी नियंत्रण दल अभी से स्थानों को आइडेंटिफाई कर स्प्रे कर रहे हैं। स्प्रे करने से कुछ टिड्डियां मर गईं, लेकिन अभी यह बताना मुश्किल है कि इनका फैलाव कितना है। यह भी दिलचस्प है कि दो साल पहले मारे गए अंडे में से कुछ टिड्डियां निकल रही हैं।

अगस्त में कमजोर मानसून ने भी चिंता और बढ़ा दी है

टिड्डी के अलावा बारिश भी किसानों को परेशान कर रही है। मार्च से अप्रैल तक बेमौसम बरसात हुई। फिर भी, भले ही मानसून की शुरुआत अच्छी रही हो, यह अब इतना कमजोर हो गया है कि इस बार अगस्त में सबसे कम बारिश होने की उम्मीद है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में अगस्त महीने में पिछले 12 वर्षों में सबसे कम बारिश हुई है। आधा महीने बीतने के बाद भी राज्य में औसत बारिश बहुत कम हुई है। वैसे, अगस्त मानसून सीजन में अच्छी बरसात का महीना होता है।

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